प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ एक्शन में बिहार सरकार, एडमिशन को लेकर सभी DEO से मांगी रिपोर्ट

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Patna: सरकार की लाख सख्ती के बाद भी बड़ी संख्या में राज्य के गरीब बच्चे शिक्षा के अधिकार (Right to education) से वंचित हैं और इसकी शिकायतें भी लगातार शिक्षा विभाग को मिल रही हैं. प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने शिकायतों को देखते हुए चरणबद्ध कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है.

निदेशक डॉ रणजीत कुमार सिंह ने एक साथ 35 जिलों के डीईओ और डीपीओ (DEO and DPO) से शिक्षा का अधिकार कानून यानि आरटीई के तहत निजी स्कूलों में कमजोर वर्ग के नामांकित 25 प्रतिशत बच्चों की रिपोर्ट एक सप्ताह में मांगी है.  तीन जिलों- सीतामढ़ी, बेगूसराय व पश्चिम चंपारण (Sitamarhi, Begusarai and West Champaran) को छोड़ सभी जिलों से शिक्षा विभाग ने अपने सूत्रों के हवाले से भी पता किया है कि बड़ी संख्या में निजी स्कूलों ने आरटीई का उल्लंघन किया है जिसके बाद रिपोर्ट की मांग की गई है.

प्राथमिक शिक्षा निदेशक रणजीत सिंह की मानें तो आरटीई के तहत सभी जिलों के निजी स्कूलों को बिहार अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2011 के तहत  25 प्रतिशत गरीब व कमजोर वर्ग के बच्चों का मुफ्त में नामांकन लेना है और जिसकी रिपोर्ट जिले के डीईओ और डीपीओ को प्रतिवर्ष शिक्षा विभाग को भेजनी है. निदेशक ने कहा कि निजी स्कूलों में नामांकित कमजोर वर्ग के बच्चों के नामांकन और पढ़ाई के एवज में प्रति स्टूडेंट सरकार स्कूल को फीस के रूप में सालाना करोड़ों रुपये राशि मुहैया कराती है बावजूद निजी स्कूलों के द्वारा नामांकन लेने में आनाकानी की शिकायतें मिल रही है और गरीब बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहे हैं.

निदेशक ने कहा कि सभी डीईओ और डीपीओ एक सप्ताह के भीतर जिलों की रिपोर्ट भेजेंगे जिसके बाद स्कूल वाइज समीक्षा की जाएगी साथ ही जरूरत पड़ने पर छात्रों का भौतिक सत्यापन भी शिक्षा विभाग की टीम करेगी. उन्होंने साफ कहा कि आरटीई के दायरे में आनेवाले किसी भी स्कूलों के आरोप की पुष्टि होती है तो कार्रवाई की जाएगी. न सिर्फ आरटीई की राशि पर सरकार रोक लगाएगी बल्कि दोषी पाए जाने पर एफिलिएशन रद्द करने की भी सीबीएसई से सरकार अनुशंसा करेगी.