Tuesday, January 19, 2021

बिहार के 300 मुखिया के लिए बुरी खबर, इसबार नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, जानिए क्यों आएगा ऐसा संकट

Patna:बिहार के लगभग 300 मुखिया के लिए एक बुरी खबर है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अब वे मुखिया नहीं रह पाएंगे. दरअसल वे चुनाव ही नहीं लड़ पाएंगे. मुखिया के साथ -साथ सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच और पंचायत समिति के लिए भी ऐसा ही संकट आने वाला है. हम आपको बता दें कि इसी साल अप्रैल-मई में ग्राम पंचायत चुनाव होने हैं.

इसबार चुनाव में बिहार में अब लगभग 8000 ही मुखिया होंगे क्योंकि 300 पंचायतों का अस्तित्व खत्म होने जा रहा है. जैसा कि आप सबलोग जानते हैं कि राज्य में अब 117 नए नगर निकायों का गठन होने जा रहा है. इतना ही नहीं कई नगर निकायों का तो विस्तार भी होने वाला है. और यही मुख्य कारण है कि करीब 300 ग्राम पंचायतें अब नहीं रहेंगी. यानी कि इनका अस्तित्व खत्म हो जायेगा.

इसके अलावा कुछ ग्राम पंचायतों का नये सिरे से गठन होगा, क्योंकि इन पंचायतों का अधिकतर हिस्सा नगर निकाय में गया है, पूरा नहीं गया है. पंचायती राज अधिनियम के अनुसार किसी भी पंचायत-वार्ड में लगातार दो चुनावों के लिए आरक्षण लागू रहता है. हम आपको बता दें कि साल 2016 के पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण बदले गए थे. बिहार में गठित होने वाली नई ग्राम पंचायतों में इस बार आरक्षण की स्थिति क्या होगी, इसको लेकर पंचायती राज विभाग में मंथन शुरू हो गया है.

इसलिए इसबार के चुनाव में पंचायतों के आरक्षण में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. पर, जो नयी पंचायतें होंगी, सिर्फ उनके लिए सरकार निर्णय लेगी.इसके लिए क्या नियमावली होगी, यह तय किया जाएगा.इसके बाद सभी जिलों को विभाग की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे. फिर उसी के आधार पर नयी पंचायतों में चुनाव कराए जाएंगे.

अप्रैल-मई में ग्राम पंचायत चुनाव होने हैं. ऐसे में नयी ग्राम पंचायतों में आरक्षण क्या होगा, इस पर शीघ्र निर्णय लिये जाएंगे. पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है. अभी मतदाता सूची पर काम हो रहा है. इलेक्शन कमीशन के मुताबिक राज्य में पंचायत चुनाव के दौरान 6 पदों के लिए चुनाव होंगे. इनमें मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के पद शामिल हैं.

बिहार में पंचायत के आम चुनाव को लेकर 700 मतदाताओं पर एक बूथ का गठन किया गया है. आपको बता दें कि कोरोना काल में बिहार विधानसभा चुनाव में 1000 मतदाताओं पर एक बूथ गठित था. बिहार निर्वाचन आयोग ने ग्रामीण इलाकों में होने वाले इस चुनाव को लेकर बूथों के गठन को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. नीतीश सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग को ग्राम पचंयातों के चुनाव प्रमंडलवार कराने के लिए प्रस्ताव भेजा है.

नीतीश सरकार के भेजे गए प्रस्ताव पर बिहार राज्य निर्वाचन आयोग विचार कर रहा है. बहुत जल्द ही इस बात पर निर्णय लिया जायेगा. राज्य में नौ प्रमंडल हैं, इसलिए माना जा रहा है कि 6 पदों के लिए 9 चरणों में पंचायत चुनाव कराया जा सकता है. आपको बता दें कि आयोग के साथ पंचायत चुनाव पर चल रहे मंथन के दौरान पंचायती राज विभाग ने परामर्श दिया है कि प्रमंडल स्तर पर चुनाव कराना कई मायनों में बेहतर होगा.

बिहार में पंचायत के आम चुनाव को लेकर 700 मतदाताओं पर एक बूथ का गठन किया गया है. आपको बता दें कि कोरोना काल में बिहार विधानसभा चुनाव में 1000 मतदाताओं पर एक बूथ गठित था. बिहार निर्वाचन आयोग ने ग्रामीण इलाकों में होने वाले इस चुनाव को लेकर बूथों के गठन को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. ईवीएम से आम चुनाव कराए जाने को लेकर पंचायतीराज विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है.

प्रमंडलवार चुनाव कराने को लेकर पंचायती राज विभाग का मानना है कि इससे किसी भी जिले में अधिक दिनों तक आचार संहिता लागू नहीं रहेगा. इससे संबंधित जिले में विकास के कार्य प्रभावित नहीं होंगे. राज्य के हर जिले में कई-कई चरणों में चुनाव होने से काफी अधिक दिनों तक आदर्श आचर संहिता ग्रामीण क्षेत्रों में लागू रहता है.

मुखिया और सरपंच का चुनाव भी ईवीएम मशीन से ही कराया जायेगा. विभाग ने ईवीएम से पंचायत चुनाव कराए जाने को लेकर सैद्धांतिक सहमति दे दी है और इस प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद आयोग द्वारा ईवीएम से चुनाव को लेकर तैयारी शुरू की जाएगी. आपको बता दें कि बिहार में कुछ ही महीनों बाद अप्रैल-मई में ही पंचायत चुनाव होने की संभावना है, इसको लेकर तैयारी शुरू की गयी है.

बिहार का एक भी सरकारी विद्यालय सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं, देखें यह रिपोर्ट

Desk: प्रदेश में तीन साल से संचालित मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम का संचालन में लापरवाही बरती जा रही है. हालत यह है कि प्रदेश के 88172 से अधिक सरकारी एवं अनुदानित स्कूलों में से 31610 स्कूलों में अग्निशमन यंत्र नहीं हैं.

राज्य में एक भी ऐसा सरकारी और अनुदानित विद्यालय नहीं है, जो शत प्रतिशत सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता हो. इन बातों का खुलासा हाल ही में शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को सौंपे गये प्रतिवेदन में हुआ है. यह प्रतिवेदन भारत सरकार को भेजा गया है. स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए चल रहे इस कार्यक्रम के प्रति उदासीनता से नाराज प्रधान सचिव संजय कुमार ने सभी जिला पदाधिकारियों को उचित कदम उठाने के लिए कहा है. मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के तहत संचालित किया जा रहा है.

आपदा प्रबंधन समिति का गठन नहीं

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक कुल विद्यालयों में से 18472 स्कूलों में विद्यालय आपदा प्रबंधन समिति का गठन नहीं हुआ है. 16472 स्कूलों में बाल प्रेरकों का चयन और प्रशिक्षण नहीं हुआ है. 16472 स्कूलों में जोखिम या खतरों की पहचान नहीं हुई है. 27243 स्कूलों में आपात प्रबंधन की योजना भी नहीं बनी है. 72530 स्कूलों में रेक्ट्रोफिटिंग तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं किया गया है. 16472 में सुरक्षित शनिवार की मॉक ड्रिल नहीं हो सकी है. 18472 स्कूलों में आपदा प्रबंधन के बारे में पढ़ाया भी नहीं जाता है. एक भी विद्यालय में बचाव प्लान और मैप भी नहीं बनाया गया है.

फोकल शिक्षक की व्यवस्था नहीं

9039 स्कूल ऐसे हैं, जहां अभी तक इनके लिए फोकल शिक्षक (विशेषज्ञ शिक्षक) की व्यवस्था तक नहीं है. सबसे बड़ी बात यह है कि जहां हैं, वहां भी बेहतर ढंग से अपनी भूमिका नहीं निभा रहे हैं. बात साफ है कि मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका है.

इन 5 चुनौतियों को पार कर लेंगे तो बिहार में बनी रहेगी नीतीश सरकार, जानें क्या है खतरा!

Desk: बिहार में सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के नेतृत्व में एनडीए की सरकार (NDA Government) चल तो रही है, लेकिन फिलहाल वह मजबूती नहीं दिख रही है जो बीते वर्षों में रही है. चुनाव नतीजों में बहुमत और अल्पमत के बीच बहुत अधिक सीटों का अंतर नहीं होने से विधायकों के कभी भी पाला बदलने के खतरे के बीच चल रही सरकार को लेकर हर वक्त संशय बरकरार है. बिहार एनडीए की राजनीति में जेडीयू (JDU) का बीजेपी (BJP) के सामने ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रहना भी पार्टी व इसके नेताओं के लिए मुश्किल स्थितियां पैदा कर रही हैं. ऐसे में सीएम नीतीश कुमार के सामने सरकार व पार्टी स्तर पर दोहरी चुनौती है.

सीएम नीतीश कुमार के सामने सबसे पहली चुनौती सरकार पर नियंत्रण का है. दरअसल सरकार पर नियंत्रण का मतलब है कि नीतीश कुमार को जब मंत्रिमंडल का विस्तार करना होगा तो जेडीयू के ज्यादा विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करना. दरअसल इस बार जेडीयू के विधायकों की संख्या कम (43) है और अगर इसी अनुपात में मंत्रिमंडल का विस्तार होता है तो मुश्किल यह भी होगी कि भाजपा के मंत्री ज्यादा होंगे और जेडीयू के कम. ऐसे में सरकार के ऊपर नीतीश कुमार का नियंत्रण कैसे होगा यह देखना दिलचस्प रहेगा.

मजबूत विपक्ष से नीतीश का सामना
दूसरी बड़ी चुनौती होगी कि मजबूत विपक्ष का सामना करना. दरअसल पहली बार ऐसा हो रहा है बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार के सामने एक मजबूत विपक्ष भी है. 243 सदस्यीय विधानसभा में 115 विधायक नीतीश कुमार की सरकार के खिलाफ हैं. सबसे बड़ी बात यह भी है कि ऐसा लग रहा है कि अगर विपक्ष मजबूती के साथ सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए, या सरकार की कमियों को दिखाए या जनता तक अपनी बात पहुंचा पाए तो आगे के लिए नीतीश कुमार इस गठबंधन के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. क्योंकि मजबूत विपक्ष का सामना नीतीश कुमार कैसे करेंगे यह भी देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा. विशेष बात यह कि इसी वर्ष सरकार का पहला बजट भी आने वाला है. इस बजट में विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को खेलता है और सरकार से बचने के लिए क्या कुछ करती है यह भी देखना होगा.

सहयोगियों से भी बना हुआ है खतरा
सीएम नीतीश के सामने एक बड़ी चुनौती अपने दो सहयोगियों, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी व विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी को साथ रखने की भी रहेगी. हालांकि मांझी बार-बार यही कह रहे हैं कि वह एनडीए सरकार के साथ खड़े हैं, लेकिन बीते दिनों वे तेजस्वी को अपने पुत्र समान बताकर अपने प्रेम (सियासी) का इजहार भी कर चुके हैं. ऐसे भी मांझी के बारे में यह बात प्रचलन में है कि उनका मन कब डोल जाए कोई नहीं जानता है. इसी तरह मुकेश सहनी भी राबड़ी देवी के करीबी माने जाते रहे हैं. हालांकि बीते विधानमंडल सत्र में इन दोनों के बीच काफी तीखी बहस भी हुई थी, बावजूद इसके बिहार की सियासत में कब क्या हो जाए कोई नहीं कह सकता. जाहिर तौर पर अगर इन दोनों साथ रखे रहना नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती होगी.

सुशासन की छवि बरकरार रखने की चुनौती
नीतीश कुमार की सबसे बड़ी चुनौती है सुशासन की छवि को वापस लाना होगी. दरअसल नीतीश कुमार को लोग सुशासन बाबू भी कहते हैं. लेकिन हाल के दिनों में बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है. लूट और हत्याओं का सिलसिला बदस्तूर है. ऐसे में नीतीश कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2005 से 2010 की सरकार वाली छवि को पुनर्स्थापित करना है. इसके साथ ही सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार के सुशासन वाली छवि नहीं रह गई है? दरअसल इस बार भी उनके सत्ता में वापसी का कारण यह माना जा रहा है कि उनकी सुशासन बाबू की छवि बरकरार है और इस कारण नीतीश कुमार पर जनता का भरोसा बना हुआ है. जाहिर है अगर यह छवि टूटती है तो स्वाभाविक तौर पर यह नीतीश कुमार की राजनीति के लिए बड़ा ही सेटबैक साबित होगा. ऐसे में इस छवि को बरकरार रख पाना कठिन चुनौती है.

शराबबंदी के मुद्दे पर विपक्ष से होता रहेगा सामना
नीतीश कुमार के सामने एक बड़ी चुनौती कांग्रेस और विपक्ष के द्वारा लगातार शराबबंदी कानून को वापस लिए जाने की मांग को लेकर है. हालांकि बिहार में अभी भी शराबबंदी कानून लागू है, लेकिन नेशनल हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि बिहार में शराब पीने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में क्या यह माना जाए कि क्या शराबबंदी को लेकर नीतीश कुमार कुछ और सख्त फैसले लेंगे? उनके सामने यह चुनौती भी होगी कि जो विपक्ष आरोप लगा रहा है कि युवा शराब तस्कर बन रहे हैं. गली मोहल्लों में खुलेआम शराब बिक्री हो रही है. उस क्या वह उस पर रोकथाम कर पाएंगे? क्या कानून का शिकंजा ऐसे तत्वों पर कसेगा?

शराबबंदी पर मांझी के स्टैंड से नीतीश को परेशानी!
इस मुद्दे पर पर उनकी राह में बड़ी अड़चन उनके सहयोगी पूर्व सीएम जीतन राम मांझी भी होंगे जो लगातार शराबबंदी के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं. शासन में आने के बाद भी उन्होंने कई बार शराबबंदी को लेकर अपनी बात सामने रखी है और बेगुनाहों को जेल से छोड़ने की अपील की है. ऐसे में नीतीश कुमार के सामने न सिर्फ विपक्ष बल्कि अपने सहयोगियों को साधने की भी चुनौती होगी.

जेडीयू का दूसरे प्रदेशों में विस्तार करने की चुनौती
जेडीयू को विस्तार देना भी नीतीश कुमार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. प्रशांत किशोर के जेडीयू से आउट होने के बाद अब आरसीपी सिंह को पार्टी संभालने की जिम्मेदारी दी गई है. वे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए हैं तो स्वभाविक तौर पर नीतीश कुमार के मन में यह है कि जेडीयू का और विस्तार हो. लेकिन जैसे अरुणाचल प्रदेश में जनता दल यू के अधिकतर विधायक टूटकर बीजेपी में मिल गए और और जेडीयू के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिया, ऐसे में नीतीश कुमार को अपनी पार्टी बचाना बड़ा ही मुश्किल भरा सबक है. हालांकि नीतीश कुमार ने कहा है कि उनकी यह कोशिश होगी कि बिहार के बाहर जेडीयू का विस्तार हो और वह इसी सिलसिले में वह बंगाल विधानसभा चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं.

नए साल में DJ बजाकर डांस कर रही थी लड़कियां, तेज आवाज से परेशान पड़ोसी ने जमकर पीटा

Desk: नए साल के मौके पर लड़कियां डीजे के तेज साउंड पर डांस कर रही थी, लेकिन इस तेज साउंड के कारण पड़ोसी परेशान था. जिससे नाराज पड़ोसी ने लड़कियों की बाल पकड़कर पिटाई कर दी. यह मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर का है.

एक साथ जुटी थी कई सहेली

घटना के बारे में बताया जा रहा है कि नए साल के मौके पर एक साथ कई लड़कियां जुटी हुई थी. जश्न का माहौल था. सभी गाने पर डांस कर रही थी, लेकिन तेज आवाज से परेशान पड़ोसी को यह पसंद नहीं आ रहा था. जिसके बाद पहुंचा और लड़कियों की पिटाई कर दी. इस दौरान जब परिजन आए तो परिजनों के साथ भी मारपीट किया.

जबरन करा रहा था साउंड बंद

परिजनों ने बताया कि दर्रीघाट एक घर में लड़कियों की पार्टी चल रही थी. इस दौरान पड़ोसी सोनू बर्मन वहां आ गया और डीजे बंद करने के लिए कहने लगा और शोर करने लगा. इस पर लड़कियों ने कहा कि बंद कराने वाले आप कौन होते हैं. जिसके बाद वह भड़क गया. आरोपी के खिलाफ पुलिस के पास शिकायत दर्ज करायी गई है.

बिहार को नए साल में मिलेंगी 17 पुलों की सौगात, यहां देखिये पूरी लिस्ट

Desk: बिहार को साल 2021 में कई अहम तोहफे मिलने वाले हैं. CM नीतीश अपने सात निश्चय योजना पार्ट-2 को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इसी कड़ी में राज्य को अगले चार सालों में कुल 17 नए पुलों की सौगात मिलने वाली है. बताया जा रहा है कि इन 17 पुलों में से केवल गंगा नदी पर 13 पुल बनेंगे. वहीं कोसी नदी पर दो, कर्मनाशा और सोन पर एक-एक पुल बनेंगे.

इन पुल परियोजनाओं में केंद्र सरकार की भी भागीदारी है. पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पटना में गंगा नदी पर महात्मा गांधी सेतु का फोरलेन में फिलहाल दो लेन पर ही यातायात हो रहा है. लगभग साढ़े पांच किमी की लंबाई में अन्य दो लेन की मरम्मत की जा रही है, इसका निर्माण साल 2021 तक पूरा हो जाएगा. वहीं गांधी सेतु के समानांतर करीब पांच किलोमीटर लंबे चार लेन वाले नए पुल का निर्माण अगले साल शुरू होगा. इसे 2024 तक बनने की संभावना है. इसके लिए जमीन उपलब्ध है. वहीं , जेपी सेतु के समानांतर दो लेन के केबल रोड ब्रिज करीब तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा. फिलहाल दो लेन के जेपी सेतु पर यातायात हो रहा है. साथ ही अगले साल सोन नदी पर तीन लेन का कोइलवर पुल बनकर तैयार हो जाएगा.

भागलपुर में चार किमी लंबे और 1110 करोड़ रुपये की लागत वाले विक्रमशिला सेतु के समानांतर नए पुल के निर्माण के लिए भी टेंडर जारी कर दिया गया है. इस पुल के 2024 तक तैयार होने की बात कही जा रही है. मुंगेर घाट पर दो लेन रेल सह सड़क पुल के एप्रोच रोड का निर्माण होना है. इसकी लंबाई करीब 14.51 किमी है और करीब 227 करोड़ रुपये की लागत से मई, 2021 में यह तैयार हो जाएगा. सुल्तानगंज से अगवानी घाट के बीच गंगा नदी करीब 160 मीटर लंबा और 1710 करोड़ रुपये की लागत से दो मई, 2019 से बनना शुरू हुआ था. जून 2021 तक इसका निर्माण पूरा होने की बात कही जा रही है.

इधर कोसी नदी पर दो लेन पुल एनएच 527ए पर मधुबनी के भेजा और सुपौल के बकौर के बीच करीब 13.3 किमी की लंबाई में 1101 करोड़ रुपये की लागत से, अगस्त 2023 में पूरा होगा. वहीं, कोसी नदी पर एनएच-106 पर फोरलेन फुलौत पुल बनेगा, इसके निर्माण एजेंसी का चयन हो गया है. इस फोरलेन पुल की लंबाई करीब 6.93 किलोमीटर होगी. साथ ही एप्रोच रोड के साथ इसकी लंबाई करीब 28.94 किमी होगी. इसके निर्माण पर करीब 1478.84 करोड़ की लागत का अनुमान है.

बेगूसराय में राजेंद्र सेतु के समानांतर सिमरिया में रेल-सह-सड़क पुल का निर्माण 1491 करोड़ रुपये की लागत से 2016 में शुरू हुआ था. इसे अगले साल तक बनने की संभावना है. फोरलेन एप्रोच रोड सहित सिक्स लेन औंटा-सिमरिया पुल करीब 8.15 किमी की लंबाई में 1161 करोड़ रुपये की लागत से फरवरी, 2022 तक बनकर तैयार होगा. फोरलेन मटिहानी-सांभो पुल एप्रोच सहित करीब 22 किमी की लंबाई में करीब पांच हजार करोड़ रुपये की लागत से बनेगा. इसकी डीपीआर बन रही है. नये साल में निर्माण शुरू होने की संभावना है. इसका निर्माण 2024 में पूरा होने की संभावना है.

बक्सर-चौसा के बीच ढाई किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण 14 मई, 2018 में शुरू हुआ था इसे 2021 में बनने की संभावना है. बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले छह किलोमीटर लंबे मनिहारी से साहेबगंज पुल के निर्माण पर 1900 करोड़ रुपए की लागत आएगी, जिसका टेंडर जारी किया गया है. इस पुल का निर्माण सितंबर, 2024 तक पूरा होने की संभावना है.

बिहार में अब बाइक लूट से मॉब लिंचिंग तक सब पर लगेगा लगाम, ट्रांसफर से सख्ती के संकेत

Desk: बिहार में IAS-IPS का प्रोमोशन हो रहा था, नई पोस्टिंग भी तय थी। लेकिन, राज्य की नीतीश कुमार सरकार ने प्रशासन के साथ पुलिस महकमे में ट्रांसफर पर खूब माथापच्ची की। चुनाव के बाद बाइक लूट से मॉब लिंचिंग तक की घटनाओं से सरकार की किरकिरी के कारण IPS महकमे में एक दर्जन जिलों में सीधा और बड़ा बदलाव किया गया है। तीन जिलों में DM के साथ पुलिस कप्तान को भी बदल दिया गया। छपरा में DIG और SP, दोनों नए दिए गए हैं। इन तबादलों पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सवाल भी खड़े किए। इसलिए, भास्कर बता रहा है तबादलों के पीछे की पूरी हकीकत।

अपराध के ट्रेंड मुताबिक किए गए ट्रांसफर
बिहार में चुनाव के बाद से हर तरह का अपराध बढ़ता दिखा। हत्याओं के साथ अपहरण, रेप की घटनाएं तो सामने आई हीं, वर्षों से कम नजर आने वाली बाइक लूट और लूट के दौरान हत्या तक की घटनाएं भी हुईं। पुलिस पर भरोसा नहीं करते हुए दो साल पहले की तरह एक बार फिर आम लोगों ने कानून हाथ में लेकर मॉब लिंचिंग की कई घटनाओं को अंजाम दिया। सरकार खुद इन परिस्थितियों से परेशान थी और विपक्ष भी लगातार हमलावर था, जिसके कारण प्रभारी से स्थायी हुए DGP संजीव कुमार सिंघल को मुख्यमंत्री की ओर से हर तरह की सख्ती के लिए ताकीद की गई थी। मुख्यमंत्री ने दो बार खुद बैठक की और एक बार तो पुलिस मुख्यालय ही पहुंच गए। इसके बावजूद पुलिस का इकबाल बुलंद नहीं होता देख गृह विभाग की ओर से 2020 की अंतिम रात व्यापक बदलाव से कड़ा संदेश दिया गया। कहा जा रहा है कि मुख्यालय स्तर पर बड़े बदलाव के साथ जिलों में अपराध के ट्रेंड के हिसाब से उससे निपटने में सक्षम पुलिस कप्तान दिए गए हैं।

भागलपुर, गोपालगंज, कैमूर में पुलिस कप्तान के साथ DM भी बदले
पिछले कुछ दिनों से मुख्यालय स्तर पर कई तरह की सूचनाओं के मद्देनजर भागलपुर, गोपालगंज और कैमूर में सरकार ने पूरा सेटअप ही बदल डाला है। भागलपुर के SSP और DM को बदला गया, जबकि टाउन SP का पद भी फिलहाल खाली कर दिया गया। यहां के टाउन SP को नवगछिया पुलिस जिला की कमान दी गई। नवगछिया वैसे भागलपुर जिले का ही हिस्सा है। छपरा में नए SP की भी तैनाती की गई है और यहां मुंगेर के DIG मनु महाराज को भी ट्रांसफर किया गया है।

मुख्यालय के बड़े बदलाव में भाजपा हावी
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने 2020 की अंतिम रात राज्य में व्यापक पैमाने पर हुए तबादले में भाजपा को प्रभावी कहा है। पूर्व मुख्यमंत्री का यह कहना काफी हद तक सही भी है, क्योंकि नीतीश की गुड-बुक में शामिल चार IAS अधिकारियों के कामकाज में बड़ा बदलाव हुआ है। दूसरी तरफ, चार ऐसे IPS को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, जिन्हें मुख्यमंत्री नहीं चाहते हैं। नीतीश-शासन में हल्की बातों पर भी बड़ी जिम्मेदारी से हटाए गए ऐसे कुछ IPS को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने यह बयान दिया है। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष RCP सिंह की बेटी IPS लिपि सिंह को भी सहरसा की जिम्मेदारी दी गई है।

आधा बिहार होगा सीधे-सीधे प्रभावित
नए साल के पहले दिन से आधे बिहार पर IPS ट्रांसफर-पोस्टिंग का सीधा असर पड़ेगा, जबकि पूरे राज्य पर IAS तबादले का असर दिखेगा। पूर्णिया, छपरा, सहरसा, रोहतास, भागलपुर, नवादा, नालंदा, रोहतास, कैमूर, गोपालगंज, शेखपुरा और शिवहर जिले के साथ नवगछिया पुलिस जिला के SP की नई नियुक्ति से राज्य की नीतीश कुमार सरकार ने पुलिस महकमे को कड़ा संदेश दिया है। इन तबादलों के पीछे कई अधिकारियों की प्रोन्नति की बात भले ही कही जा रही है, लेकिन पिछले दिनों CM नीतीश कुमार का पुलिस मुख्यालय पहुंचकर दिया संदेश इस तबादलों में साफ नजर आ रहा है। इसके अलावा भाजपा-जदयू, दोनों का प्रभाव भी इस तबादलों में दिख रहा है जो नीतीश कुमार सरकार के पिछले कार्यकाल में नहीं दिखता था।

पटना में आज इन तीन सेंटरों पर चल रहा कोरोना वैक्सीन का डेमो ड्राई रन

Desk: पटना में आज तीन सेंटरों पर कोरोना वैक्सीन का डेमो ड्राई रन चल रहा है। फुलवारी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य भवन में चल रहे रिहर्सल में बड़ी गड़बड़ी सामने आ रही है। यहां 25 हेल्थ वर्करों के वैक्सीनेशन की तैयारी चल रही है लेकिन यहां जिनका रजिस्ट्रेशन हुआ है, वह यहां पहुंचे ही नहीं हैं।

ऐसी स्थिति में दूसरे हेल्थ वर्कर को बिठा दिया गया है। स्वास्थ्य केंद्र पर आईं सुषमा देवी को रेखा देवी की जगह बिठाया गया है। उनके हाथ पर रेखा देवी का नाम लिखा गया है और वह उन्हीं के रजिस्ट्रेशन नंबर पर वैक्सीन लेने जाएंगी। हालांकि यह माजरा उन्हें भी नहीं समझ में आ रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की बड़ी गड़बड़ी इस वक्त सामने आ रही है।

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे फुलवारी शरीफ सेंटर पर पहुंचे। यहां उन्होंने ड्राइ रन के बारे में जानकारी ली। स्वास्थ्यकर्मियों ने बतााय कि वैक्सीन का डेमो होने के बाद मोबाइल पर मैसेज भी जा रहा है। उसमें बधाई संदेश है। स्वास्थ्य मंत्री ने मोबाइल पर मैसेज भी देखा।

पटना में बने 3 सेंटर
पटना में 3 सेंटरों पर डेमो ड्राई रन हो रहे हैं। शास्त्रीनगर शहरी स्वास्थ्य केंद्र, फुलवारी पीएचसी और दानापुर अनुमंडल हॉस्पिटल में डेमो किया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी का ने बताया कि ड्राई रन में बस टीका नहीं लगेगा। बाकी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मसलन वैक्सीन के खाली बॉक्स विधिवत सुरक्षा के साथ अस्पतालों तक पहुंचाए जाएंगे। अफसर इंतजामों की निगरानी करेंगे। किसी भी तरह की कमी होने पर उसे दुरुस्त किया जाएगा। प्रत्येक सेंटर पर एक टीम होगी। विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि सेंटर के हिसाब से हेल्थ वर्करों को एसएमएस भेजकर अगले दिन टीकाकरण की सूचना दी जाएगी।

बिहार में 1.20 करोड़ जीविका दीदियों का होगा बीमा, हॉस्पिटल के कैंटीन का देखेंगी प्रबंधन

Patna: बिहार में जीविका दीदियों का सरकार बीमा कराएगी. इसका लाभ बिहार के 1.20 करोड़ जीविका दीदियों को मिलेगा. यही नहीं सरकार ने तय किया है कि जिला के हॉस्पिटल में कैंटीन का प्रबंधन भी इनके ही जिम्मा दिया जाएगा. इसको लेकर सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है.

सीएम नीतीश कुमार शुक्रवार को सचिवालय पहुंचे और 6 घंटे समीक्षा की. सीएम ने इस दौरान अधिकारियों को 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है. सीएम ने कहा कि जीविका दीदियों के माध्यम से मद्य निषेध कार्य के लिये लोगों को प्रेरित करें.

सीएम ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के गठन से महिलाओं में जागरूकता आयी है. जीविका दीदियों के आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने से उनके परिवार की आमदनी बढ़ी है. अब जीविका दीदियों द्वारा कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, दूध उत्पादन कार्य, मधुमक्खी पालन, मुर्गीपालन, बकरी पालन जैसे कार्य बेहतर ढ़ंग से किए जा रहे हैं. इसके साथ ही नीरा के उपयोग को और बढ़ावा और मत्स्य पालन से जुड़ने के लिये भी जीविका दीदियों को प्रेरित एवं उन्हें प्रशिक्षण दें.

आज से देश में कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन शुरू, जानें- कहां और कैसे होगी प्रक्रिया

Patna: देशभर में जल्द से जल्द कोरोना वायरस की वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी देने के मकसद के साथ ही आज से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राई रन शुरू होने जा रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इससे पहले देश के चार राज्यों के दो-दो जिलों में वैक्सीनेशन टीकाकरण की तैयारियों का जायजा लेने के लिए ड्राई रन किया गया था.

यह ड्राई रन सभी राज्यों की राजधानी में कम से कम तीन साइट पर होगा. कुछ राज्य उन इलाकों को भी ड्राई रन में शामिल करेंगे, जो दुर्गम हों और जहां सामान की आवाजाही में मुश्किल हो. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने राज्यों में शुरू होने वाले ड्राई रन को लेकर समीक्षा बैठक की. इसके लिए टीम का गठन कर दिया गया है.

ड्राई रन के दौरान यह देखा जाएगा कि टीकाकरण के लिए लोगों का ऑनलाइन पंजीकरण, डाटा एंट्री, लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजने और टीका लगने के बाद इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण पत्र जारी करने में कोई परेशानी तो नहीं आ रही. मॉकड्रिल का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन भी निरीक्षण करेंगे. बता दें कि इससे पहले पंजाब, असम, गुजरात और आंध्र प्रदेश में ड्राई रन किया गया था, जिसके रिजल्ट काफी सकारात्मक आए थे.

बिहार के तीन जिलों में ड्राई रन

ड्राई रन के लिए बिहार के तीन जिलों का चयन किया गया है. इसमें पटना, पश्चिम चंपारण, जमुई शामिल है. पटना के फुलवारीशरीफ अस्पताल, दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल व शास्त्रीनगर अस्पताल शामिल हैं. पश्चिम चंपारण के बेतिया के पीएचसी, चनपटिया, पीएचसी, मझौलिया और बेतिया शहरी अस्पताल तथा जमुई के बहुद्देशीय स्कूल, जमुई, प्लस टू स्कूल, जमुई और ऑक्सफोर्ड स्कूल, जमुई में पूर्वाभ्यास किया जाएगा .

पटना के इन 10 जगहों पर बनने जा रहा मेट्रो स्टेशन, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू

Patna: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime minister Narendra Modi) द्वारा 2025 तक 25 शहरों में मेट्रो ट्रेन दौड़ाने की घोषणा के बाद पटना में भी परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है। नए साल में पटना मेट्रो परियोजना को पटरी पर लाने के लिए डिपो के साथ स्टेशनों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

बुधवार को पटना रेल कॉरपोरेशन ने जिला भू-अर्जन कार्यालय को दस स्टेशनों की सूची सौंपते हुए भूमि अधिग्रहण की अधियाचना भेज दी है। इससे पहले अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के समीप पहाड़ी और रानीपुर मौजे में डिपो निर्माण के लिए नगर एवं आवास विभाग की अधियाचना के बाद 76 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा जा चुकी है।

04 रूटों में चार दर्जन से अधिक स्टेशन प्रस्तावित, कई स्टेशन भूमिगत बनाए जाने हैं
76 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है
45 दिनों के अंदर मूल्यांकन रिपोर्ट देने का दिया गया निर्देश
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी पंकज पटेल ने बताया कि पहाड़ी और रानीपुर मौजा में भूमि अधिग्रहण के लिए सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी विकास प्रबंधन संस्थान को सौंप दी गई है। संस्थान को 45 दिनों के अंदर मूल्यांकन रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। बुधवार को मिली स्टेशनों की सूची के भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद मूल्यांकन का कार्य कराया जाएगा।

भू-अधिग्रहण के लिए अधियाचना

स्टेशन : मौजा : रकबा (एकड़)

रामकृष्णनगर : जगनपुरा : 0.1422
रामकृष्णनगर : चांगड़ : 0.174
मीठापुर वायोडेक्ट : विग्रहपुर : 0.4812
पीएमसीएच : मोहर्रमपुर : 0.0722
आकाशवाणी : मोहर्रमपुर : 0.1024
भूतनाथ : बहादुरपुर : 0.0189
खेमनीचक मेट्रो क्रासिंग : जगनपुरा : 0.0830
न्यू आइएसबीटी : पहाड़ी : 2.1819
खेमनीचक : जगनपुरा : 0.071
डिपो सह स्टेशन : पहाड़ी और रानीपुर : 76.00

तीन चरणों में पूरी होगी मेट्रो परियोजना

पटना मेट्रो परियोजना को तीन चरणों में पूरा किए जाने की योजना है। चार रूटों में चार दर्जन से अधिक स्टेशन प्रस्तावित हैं। कई स्टेशन भूमिगत बनाए जाने हैं। प्रस्तावित कई स्टेशनों के लिए सरकारी जमीन चिन्हित की गई है। जिन स्टेशनों के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हैं, वहां भूमि अधिग्रहण के लिए क्रमवार अधियाचना भू-अर्जन कार्यालय को दी जा रही है। पहले डिपो और अब दस स्टेशनों की अधियाचना के साथ ही अधिग्रहण प्रक्रिया प्रारंभ हो गई। नए साल के पूर्वार्ध में भूमि अधिग्रहण का लक्ष्य रखा गया है।