बिहार में फ्लॉप रहा तेजस्वी का लालटेन जलाओ कैंपेन

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Patna: नीतीश कुमार कहते है बिहार में LED युग है, लालटेन की जरूरत नहीं है तो तेजस्वी यादव हर घर में लालटेन की लौ जलाने की कोशिश कर रहे हैं. इस राजनीतिक खेल में फिलहाल किसकी जीत होगी ये कहना तो जल्दबाजी होगी लेकिन कोरोना और बेरोजगारी के बहाने रौशनी बुझाने के आंकड़े ने दोनों के दावों की एक हकीकत सामने ला दी है और ये आंकड़ा भी बेहद दिलचस्प है.

जेडीयू नेता और बिहार सरकार के मंत्री नीरज कुमार ने तेजस्वी के कार्यक्रम के अगले दिन एक आंकड़ा जारी किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 April को कोविड-19 के खिलाफ लड़ने का संकल्प लेने के लिए जब देशवासियों से अपील की थी तब बिहार में 5 अप्रैल को 3828 मेगावाट बिजली की खपत थी वहीं जब आह्वान के बाद बिजली की खपत को देखा गया तो 1699 मेगावाट थी यानी 55 प्रतिशत कम बिजली की खपत हुई.

दूसरी तरफ जब तेजस्वी यादव ने बिहार के लोगों से आर्थिक मंदी और बेरोजगारी को लेकर अपने अपने घरों में नौ मिनट के लिए बिजली को बंद करने का आह्वान किया तो आह्वान के पहले बिजली की खपत 5573 मेगावाट थी वहीं जब आह्वान खत्म हुआ तो खपत था 5517 मेगावाट, यानी बिजली की खपत महज एक प्रतिशत कम हुई.

नीरज कुमार ने इस आंकड़े को जारी करते हुए चुनौती भी दी कि इस आंकड़े को जैसे भी जांचना हैं जांच लें. नीरज ने इसके साथ ये भी कहा कि इस आंकड़े से तेजस्वी की लोकप्रियता बिहार में कितनी है और जनता का मूड क्या है ये समझ जाना चाहिए. अब बिहार में एलईडी युग हैै लालटेन की कोई जरूरत नहीं हैै.
राजद विधायक विजय प्रकाश कहते हैं कि आंकड़ों का खेल खेलने में तो नीतीश कुमार शुरू से ही माहिर माने जाते हैं. उनकी सरकार, उनके आंकड़ें उन्हीं को मुबारक हों. हम जनता के दिल में बसते हैं और जनता इसका जवाब चुनाव में देगी. विजय ने कहा कि हमें ये नहीं मालूम था की सरकार के साथ-साथ सरकारी मशीनरी भी हमारे आह्वान पर इस कदर मुस्तैद थी.