चिराग को भी नीतीश का चेहरा ही पसंद, बस लोजपा अपने मुद्दों पर चाह रही तवज्जो

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Patna:जदयू-लोजपा के तल्ख हो रहे रिश्तों के बीच लोजपा ने भाजपा को साफ-साफ बता दिया है कि बिहार में उसे किसी चेहरे को लेकर कोई रंज नहीं। भाजपा ने जो तय किया है, उसे वह गठबंधन धर्म के नाते हर हाल में स्वीकार करेगी, पर पार्टी द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर तवज्जो का खास ख्याल है। बात उस समय बिगड़ जाती है, जब अगर सड़क के गढ्ढे और डायल-100 के काम नहीं करने की बात कहने पर लोजपा के खिलाफ गठबंधन में भृकुटी तन जाती है।

जदयू-लोजपा के बीच मनमुटाव की बात जब चर्चा में आई तो उसी समय भाजपा के दिग्गज स्थिति को सामान्य करने के लिए सक्रिय हो गए। लोजपा के नीति-निर्धारकों का कहना है कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कभी भी नीतीश कुमार के खिलाफ कुछ नहीं कहा। यह तो उसे पता ही है कि अमित शाह ने दो बार यह कहा है कि विधानसभा चुनाव में गठबंधन का चेहरा नीतीश कुमार ही होंगे। स्थानीय स्तर पर भी यह कहा गया कि बीच जंग में सेनापति नहीं बदला जाता। ऐसे में चेहरे को लेकर कहां कोई प्रश्न उठता है। फिलहाल लोजपा ने सीटों का मामला भाजपा पर छोड़ दिया है। अलबत्ता यह बता दिया गया है कि किन-किन सीटों पर उसकी दावेदारी है।

लोजपा के अंदरखाने से यह खबर है कि वह सीटों के बंटवारे से अधिक इस बात पर अड़ी है कि आरंभ में इस बात पर सहमति बन जाए कि अगली सरकार का संचालन एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम (कॉमन मिनिमम प्रोग्राम) के तहत होगा। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में लोजपा के उन मुद्दों को जोड़ा जाए, जिसे वह ‘बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट’ यात्रा के दौरान उठाती रही है। इसमें परेशानी इस बात पर है कि चिराग द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों पर जदयू की सहमति नहीं है।

अक्सर यह चर्चा हो जा रही कि चिराग राजग को छोड़कर दूसरे गठबंधन में जा रहे। इस क्रम में यह बात आ जा रही कि कांग्रेस चाहती है कि लोजपा उनके साथ आ जाए। तेजस्वी ने भी राजद में आने का आमंत्रण दिया हुआ है। पप्पू यादव भी चिराग को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर चुनाव में उतरने की बात कर रहे। लोजपा के दिग्गजों का कहना है कि पार्टी के भीतर इस पर कोई चर्चा नहीं। यह तय है कि राजग के बाहर वाले गठबंधन में तेजस्वी की जगह चिराग को चेहरा प्रोजेक्ट नहीं किया जा सकता। ऐसे में राजग से बाहर निकलने का कोई मतलब नहीं।