Kisan Chachi “किसान चाची” की कहानी, जिन्हें मिला पद्मश्री सम्मान

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किसान चाची (kisan Chachi)

आइये जानते है “किसान चाची” (Kisan Chachi) की कहानी

अगर आप बिहार से है तो “किसान चाची” (राजकुमारी देवी) का नाम जरुरु सुनें होंगे। जिन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया, और बिहार सरकार ने किसान श्री से सम्मानित किया है। आज के इस ब्लॉग में हम बतायेंगे राजकुमारी देवी (Kisan Chachi) की पूरी कहानी:-

एक ऐसी महिला की कहानी जो कभी दो वक्त के भोजन के लिए भी तरसती थी, उनके आत्मविश्वास और “किसान चाची” बनने की कहानी ने बाकी अन्य महिलाओं का केवल आत्मविश्वास ही नहीं बढ़ाया बल्कि उन्हें स्वावलंबी बनने की प्रेरणा भी दी है, पर यह बिहार है साहब ऐसे इतिहास रचने वाले लोगों से तो बिहार की भूमि फल-फूल रही है।

आपको बता दें कि हमारी “Kisan Chachi” की कहानी भी बड़ी ही अनोखी है, जो कभी बाकी महिलाओं की तरह घर में केवल भोजन पकाने और अपने परिवार का ख्याल रखने के लिए जानी जाती थी, पर आज इनकी चर्चे पूरे देश में होने लगे हैं, तो आइए जानते हैं उनकी “किसान चाची” बनने का सफर…..

हम एक ऐसे समाज से ताल्लुक रखते हैं जहां पर हर क्षेत्र में पुरुषों का वर्चस्व अधिक माना जाता है, फिर चाहे वह कृषि क्षेत्र हो या फिर कोई बिजनेस, लेकिन इन सारी बाधाओं को तोड़ते हुए मुजफ्फरपुर की राजकुमारी देवी उर्फ “किसान चाची” ने अपना कदम आगे बढ़ाया। वह मिलो गांव में साइकिल चलाकर किसानों के बीच एक ऐसी क्रांति लाई कि आज उनका वर्चस्व 100 पुरुषों से भी अधिक है। “किसान चाची” ने महिलाओं को हर स्तर से खेती करने के बारे में बताया और जो घबराने लगी उन्हें हौसला दिया।

किसान चाची का यह कार्य उनके छोटे से गांव तक ही सीमित था, पर जब उन्हें इसके लिए पद्मश्री दिया गया तब उनकी चर्चा देशभर में होने लगी और केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी उनके मुरीद हो गए।आज देश का हर नागरिक भले ही राजकुमारी देवी को जाने या ना जाने पर वह “किसान चाची” और उनके संघर्ष की कहानी को जरूर जानता है।

एक शिक्षक के घर में जन्मी राजकुमारी देवी ने हमेशा से यह महसूस किया कि महिलाओं को कभी आगे आकर काम करने का मौका नहीं दिया जाता है। उनके साथ भी यही हुआ था। उनके सपनों का गला घोटकर मैट्रिक के बाद ही उनकी शादी साल 1974 में करा दी गई थी। हर महिला की तरह शादी के बाद भी उनकी जिंदगी बदलने लग गई, पर उनके सपनों को हौसला देने वाला कोई नहीं मिला। इसलिए किसान चाची ने खुद ही अपने हौसलों की उड़ान भरी।

अवधेश कुमार चौधरी से शादी के बाद राजकुमारी देवी (Kisan Chachi) शिक्षिका बनना चाहती थी, पर एक बार फिर से परिवार के हाथों मजबूर होकर उन्हें अपने सपनों को दबाना पड़ा। उसके बाद क्या हुआ….. उनके परिवार में इस कदर आर्थिक तंगी आ गई कि किसान चाची ने खेती करना शुरू किया और फिर मानो वह तपकर खड़ा सोना बन गई। उसके बाद उन्होंने बेहद ही संघर्ष किया और कृषि के क्षेत्र में खुद को पूरी तरह से कुशल बनाया।

इस बीच उन्हें यह महसूस हुआ कि कृषि के क्षेत्र में महिलाओं मे तकनीकी ज्ञान का अभाव है, जिस वजह से उन्हें पुरुषों पर निर्भर होना पड़ता है। इसके बाद तो जैसे वह महिलाओं के लिए एक शिक्षिका ही बन गई। साइकिल से मीलों का सफर तय करके उन्होंने कई महिलाओं को कृषि की नई- नई तकनीकों के बारे में बताया, जब काफी रूप से महिला उनकी ओर आकर्षित होने लगी तो उन्होंने धीरे-धीरे स्वयं सहायता समूह बनाया और फिर उन्होंने महिलाओं के बीच मूर्ति बनाने से लेकर अचार, मुरब्बे के कौशल को पूरी तरह से बढ़ावा दिया।

वहीं दूसरी ओर केंद्र में बैठी मोदी सरकार हो या फिर महानायक अमिताभ बच्चन जैसे शख्सियत इन सभी लोगों ने सार्वजनिक तौर पर किसान चाची (Kisan Chachi) की सराहना की और लोगों के लिए उन्हें एक बेहतर प्रेरणा का स्रोत बताया।

आज यदि हर महिला के खयालात “किसान चाची” (Kisan Chachi) जैसे हो जाए तो फिर हमारा आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होता हम सभी देख सकते हैं और हमारी किसान चाची भी यही मानती है कि अगर हम घरेलू उत्पाद की बिक्री को बढ़ावा देते हैं और निर्यात में प्रोत्साहन करते हैं तो बेशक बाजार में महिलाओं द्वारा बनाए गए आचार और मुरब्बे जरूर उपलब्ध होंगे।

आज जब 63 वर्षीय राजकुमारी देवी और किसान चाची (Kisan Chachi) 30 से 40 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर गांव-गांव में घूमकर लोगों के बीच जब अपने अनुभव को साझा कर सकती है तो फिर हमें एक कदम आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि हमारे समाज से महिलाओं के खिलाफ बंदिशों पर प्रतिबंध लगे ताकि उन्हें भी पुरुषों के बराबर समझा जाए और तवज्जो दिया जाए।

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