बिहार में हो रही सबसे कम कोरोना टेस्टिंग, केंद्रीय टीम ने दी चेतावनी, बढ़ सकती है मृत्युदर

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Patna: बिहार में राष्ट्रीय औसत की तुलना में बहुत कम कोरोना परीक्षण(COVID- 19 Test) अनुपात कोरोनावायरस से होने वाली मृत्युदर को प्रभावित कर सकता है। अभी बिहार में 3,423 प्रति मिलियन पर भारत में सबसे कम परीक्षण और मृत्यु दर 0.69% है। वहीं कम परीक्षण के परिणामस्वरूप संक्रमण फैल सकता है और देर से मरीजों की पहचान और अस्पतालों में कोरोना केस के देर से पहुंचने पर यह मृत्यु दर(Corona fatality rate) को प्रभावित कर सकता है।

कोरोना पॉजिटिव केस की वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए यह बात तीन-सदस्यीय केंद्रीय टीम ने कही। बिहार में कोरोना विस्फोट के बाद स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय टीम जिनमें नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के निदेशक डॉ एसके सिंह और एम्स-दिल्ली विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नीरज निश्चल 19 और 20 जुलाई को बिहार में थे।

उल्लेखनीय है कि बिहार में 12 जुलाई से रोजाना 1000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। वहीं पिछले सात दिनों में 90% सक्रिय केस सामने आए हैं। पिछले एक सप्ताह (16-23 जुलाई) में, हर दिन औसतन 6% नए कोविड- 19 संक्रमण केस की संख्या बढ़ी हैं।

आरटी पीसीआर (RT PCR) परीक्षण को बढ़ाने का सुझाव बुधवार को राज्य को अपनी सिफारिश में केंद्रीय टीम लीडर ने राज्य से मौजूदा कोरोना पुष्टिकरण परीक्षण आरटी पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलिमरेज़ चेन रिएक्शन) की क्षमता का उपयोग सुनिश्चित करने के अलावा आरटी पीसीआर परीक्षण को बढ़ाने के लिए कार्रवाई करने का भी सुझाव दिया है। केंद्रीय टीम ने आरटी पीसीआर के माध्यम से एंटीजन परीक्षणों के सभी लक्षणात्मक नकारात्मक परिणामों की निगरानी के अलावा, रोकथाम क्षेत्रों और अस्पतालों में नमूने लेने के लिए एंटीजन परीक्षण का आह्वान किया। उधर आईसीएमआर(ICMR) ने बिहार में आरटी पीसीआर (RT PCR) परीक्षण करने के लिए छह सरकारी और तीन निजी मिलाकर कुल नौ प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी है।

राज्य में उभरते हुए हॉटस्पॉट केंद्रीय टीम ने कहा कि पूर्वी चंपारण, गया, रोहतास और मुजफ्फरपुर कोरोना के लिए उभरते हॉटस्पॉट बन रहे हैं। वहीं बड़ी संख्या में कोरोना के उभरते मामलों को देखते हुए पटना, नालंदा, नवादा, सीवान, पश्चिम चंपारण, जमुई, भागलपुर बेगूसराय और मुंगेर में विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। टीम ने अगले दो महीनों में कोरोना संक्रमण के प्रसार को ध्यान में रखते हुए राज्य में अस्पताल के बुनियादी ढांचे पर भी ध्यान देने पर जोर देते हुए अस्थायी क्षेत्र के अस्पतालों की स्थापना करने का सुझाव दिया। बिहार में 11 दिनों दोगुने केस के साथ बुधवार को कुल 30,066 मामले थे। यदि इसी तरह मामला दोगुना होता रहे तो दो महीने में कोरोना का केस एक लाख के करीब पहुंच सकता है।