Mahabodhi Temple Bodhgaya: बिहार के गया में स्थित महाबोधि मंदिर हिन्दू एवम बौद्ध समुदाय की आस्था का विशेष केंद्र है।

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Mahabodhi Temple Bodhgaya-

बिहार के गया में स्थित Mahabodhi Temple Bodhgaya हिन्दू एवम बौद्ध समुदाय की आस्था का विशेष केंद्र है। नेपाल के राजा शुद्धोधन के पुत्र के रूप में सिद्धार्थ ( गौतमी के द्वारा पाले जाने कारण इन्हें गौतम भी कहा गया है ) का जन्म लुम्बिनी में ईसा पूर्व 563 ईसवी में हुआ था। इनका विवाह राजकुमारी यशोधरा से हुआ था, जिनसे इन्हें एक पुत्र राहुल की प्राप्ति भी हुई थी।

Mahabodhi Temple Bodhgaya History in Hindi

mahabodhi temple bodhgaya images
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सिद्धार्थ का मन बचपन से ही सांसारिक सुखों में नहीं लगता था, अतः उन्होंने भिक्षुक के वेश में गृह त्याग दिया और सत्य की खोज में निकल पड़े। बरसों जंगल में घुमा और तपस्या भी की, किन्तु उन्हें सत्य ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकी। घूमते- घूमते वो बिहार के गया नामक स्थान पर पहुंचे और यहां भूखे रहकर ही कठिन तपस्या की। इस तपस्या के उपरांत उन्हें ज्ञान प्राप्ति हुई और उन्हें सुजाता नामक महिला ने खीर खिला कर उनका उपवास ख़त्म करवाया। सिद्धार्थ को जब सत्य का साक्षात्कार हो गया अर्थात जब उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति हुई तो वह बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए।

जिस वृक्ष के नीचे उन्होंने तपस्या की एवम उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई , वो वृक्ष बोधि वृक्ष कहा जाता है। महात्मा बुद्ध ने 483 ईसा पूर्व में परिनिर्वाण प्राप्त किया। महात्मा बुद्ध के इस जगह पर तपस्या करने एवम ज्ञान प्राप्ति के कारण ये जगह अत्यंत प्रसिद्ध है एवम लोगों की आस्था का केंद्र है। जिस जगह उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, वो जगह गया शहर से थोड़ी दूर पर स्थित है और बोधगया के नाम से जाना जाता है।

महात्मा बुद्ध की स्मृति में यहां एक मंदिर भी है, जिसे बोधि मंदिर कहा जाता है। बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर विश्व प्रसिद्ध बौद्ध विहार ( मंदिर ) है। इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर भी घोषित किया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने 250 ईसा पूर्व में करवाया था, एवम वर्तमान मंदिर पांचवीं शताब्दी में निर्मित हुआ।
इस मंदिर में भगवान बुद्ध की एक विशालकाय प्रतिमा पद्मासन की मुद्रा में स्थापित है। ये मंदिर 4 हेक्टेयर से भी ज़्यादा परिसर में फैला हुआ है।।

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इतिहास देखें तो पता चलता है कि प्रसिद्ध चीनी पर्यटक फाह्यान ने प्रथम बार इस मंदिर और बोधि वृक्ष के बारे में 405 ईसवी में वर्णन किया था। इनके अतिरिक्त व्हेनसांग ने भी 637 ईसवी में इस मंदिर के दर्शन किये थे। उन्होंने बताया कि इस मंदिर की ऊंचाई 160 फ़ुट है। मंदिर को सात मन्ज़िले पिरामिड की आकृति में बनाया गया है, जिस पर पांच शिखर हैं।
महाबोधि मंदिर के पश्चिम में प्रसिद्ध बोधि वृक्ष अवस्थित है।

मूल वृक्ष तो समय के साथ समाप्त हो गया, किन्तु वर्तमान वृक्ष की मूल वृक्ष की पांचवीं शाखा है और इसे भी मूल वृक्ष की तरह सम्मान प्राप्त है। कालांतर में दिल्ली के मुस्लिम राजाओं ने इस पर जब कब्ज़ा जमा लिया तो लोगों ने मंदिर आना- जाना छोड़ दिया। साक्ष्य मिलते हैं कि 19 वीं शताब्दी में बर्मा के बौद्ध राजाओं ने इस मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य करवाया था, बाद में अंग्रेज़ों ने भी 1884 तक ज़ारी रखा। वर्तमान में महाबोधि मंदिर परिसर बिहार सरकार के नियंत्रणाधीन है और इसे 1949 के बोधगया मंदिर अधिनियम के तहत सरकार एवम मंदिर प्रबंधन कमिटी के द्वारा संचालित किया जाता है।

– प्रणव कर्ण ‘ स्वप्निल ‘