Matsyagandha Mandir Saharsa: बिहार के दर्शनीय एवं पर्यटन स्थल के रूप में सहरसा का मत्स्यगंधा मंदिर

48
Matsyagandha Mandir Saharsa

Matsyagandha Mandir Saharsa की पूरी जानकरी

Matsyagandha Mandir Saharsa: बिहार के दर्शनीय एवम पर्यटन स्थल के रूप में सहरसा का मत्स्यगंधा मंदिर धीरे-धीरे प्रसिद्ध होता जा रहा है। सहरसा ज़िला मुख्यालय से लगभग दो किलोमीटर दूर सहरसा कचहरी रेलवे स्टेशन के निकट शिवपुरी मुहल्ले में स्थित मत्स्यगंधा मंदिर एक अद्भुत मंदिर है। इस मंदिर में देवी काली का विग्रह उग्र रूप में स्थित है, जिसे रक्तकाली कहा जाता है। रक्तकाली की प्रतिमा स्थापना के बारे में एक दिलचस्प तथ्य है।

ये मंदिर जहां बना है, वहां पूर्व में पोस्टमार्टम रूम हुआ करता था और ठीक बगल में तिलावे धार के बहने के कारण लोग यहां शवदाह भी करते थे। इस निर्जन स्थल पर नरमुंडों एवम अस्थियों को यत्र-तत्र बिखरा देखा जा सकता था। लोग दिन में भी इधर आने से डरते थे। चूंकि सहरसा जेल इस जगह के ठीक बगल में है तो यदा- कदा मुलाक़ातियों या प्रशासन के लोगों से ही थोड़ी चहल- पहल होती थी।

1996 में तात्कालीन ज़िलाधिकारी तेज नारायण लालदास से स्थानीय लोगों का प्रतिनिधिमंडल मिला और इसके सौंदर्यीकरण के लिए ज्ञापन दिया। ज़िलाधिकारी तेज नारायण लालदास ने इस जगह का मुआयना करने के बाद इस जगह पर पर्यटन की संभावनाएं देखीं। उनके प्रयासों से यहां मंदिर निर्माण शुरू किया गया। श्मशान भूमि होने के कारण देवी के उग्र रूप रक्तकाली की प्रतिमा को स्थापित करना ही सबसे ज़्यादा उपयुक्त लगा।

ये मंदिर बेहद ही ख़ूबसूरत है और मुख्य मंदिर के ठीक सामने एक पिरामिडनुमा मंदिर का भी निर्माण किया गया, जिसमें पौराणिक मान्यताओं के अनुसार 64 योगिनियों की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। 64 योगिनी मंदिर की छटा एवम प्रतिमाएं भी सचमुच दर्शनीय हैं। इसके अतिरिक्त सहरसा ज़िले के प्रसिद्ध संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं का भी एक मंदिर इस मंदिर के ठीक बगल में है , जहां उनकी प्रतिमा स्थापित है। ज़िला पदाधिकारी तेजनारायण लालदास ने इस स्थान के सौंदर्यीकरण के लिए जलकुंभी से भर चुके तिलावे धार को साफ़ करवाया एवम इसमें मोटरबोट भी रखवाए, ताकि लोग बोटिंग का भी मज़ा ले सकें। इन प्रयासों से मत्स्यगंधा मंदिर की शोभा और भी बढ़ गई।

लोग सुबह- शाम अपने परिवार के साथ देवी के दर्शनों के लिए आते और मोटरबोटिंग का भी आनन्द उठाते। मत्स्यगंधा मंदिर प्रांगण में दिसम्बर महीने में एक मेले का भी प्रतिवर्ष आयोजन किया जाता है, जो कोरोना के कारण गत वर्ष नहीं हो सका। समय बीतने के साथ इस झील ( धार) में फिर से जलकुंभियों का साम्राज्य स्थापित हो गया है, एवम मोटरबोट भी रखे- रखे ख़राब हो गए।

निर्वतमान ज़िलाधिकारी शैलजा शर्मा ने झील की सफ़ाई एवम सौंदर्यीकरण के लिए सम्बंधित विभाग को प्राक्कलन बनाकर भेजने को कहा था, ताकि जीर्णोद्धार का कार्य सम्पन्न हो सके।
उनके असमय स्थानांतरण के बाद ये प्रक्रिया लंबित हो गई। सहरसा के लोग आज भी आशान्वित हैं कि इस झील के दिन बहुरेंगे एवम पूर्व की भांति यहां चहल- पहल हो सकेगी।
अगर झील को नज़रंदाज़ कर दें तो भी Matsyagandha Mandir Saharsa एवम 64 योगिनी मंदिर एक दर्शनीय स्थल तो है ही, एवम आपको एक बार ज़रूर देवी के दर्शन करने चाहिए।

– प्रणव कर्ण ‘ स्वप्निल ‘