लॉकडाउन से नीतीश की ताजपोशी तक 2020 के आईने में हैं ये 12 लम्हें

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Desk: 2020 अब अलविदा होने को है. इस साल के गर्भ से जनसंहार का ऐसा दानव (कोरोना) निकला जिसने दुनिया में लाखों लोगों का जीवन छीन लिया. बिहार में भी 1337 लोग इसका शिकार हो चुके हैं. 2020 को एक डरावने सपने की तरह याद किया जाएगा. कोरोना के प्रकोप से राजनीति भी प्रभावित हुई, कोरोना काल में देश का पहला विधानसभा चुनाव बिहार में हुआ. नीतीश कुमार को फायदे की उम्मीद थी इसलिए उन्होंने समय पर चुनाव का समर्थन किया. राजद को नुकसान की आशंका थी इसलिए वह चुनाव टालने के पक्ष में था लेकिन जब चुनाव हुए तो नतीजे उल्टे निकले.

राजद बिहार में सबसे बड़ा दल बन गया. नीतीश कुमार बमुश्किल सीएम तो बने लेकिन जदयू को बहुत नुकसान हुआ वह दूसरे से तीसरे स्थान पर फिसल गया. भाजपा एक अंक पिछड़ कर दूसरे नम्बर की पार्टी बनी. लोजपा का अध्यक्ष बनने के बाद चिराग पासवान का ये पहला चुनाव था. उन्होंने नीतीश कुमार को तो जरूर नुकसान पहुंचाया लेकिन अपना बेड़ा गर्क कर बैठे. बिहार में अरसे बाद वामदलों की ताकत बढ़ी. अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का रहस्यमय मामला पूरे देश में छाया रहा. यह राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बना, तो वक्त के आईने में देखते हैं 2020 की 12 तस्वीरें

जनवरी – भाजपा ,जदयू की झगड़े से शुरुआत

साल की शुरुआत ही भाजपा और जदयू के झगड़े से हुई. जिस प्रशांत किशोर (पीके) को नीतीश कुमार ने जर्रा से अफताब बनाया था वही उनके लिए मुसीबत बन गय. 1 जनवरी 2020 को जब लोगों ने सुबह-सुबह अखबार खोला तो उनकी नजर जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के एक बयान पर अटक गयी. प्रशांत किशोर ने भाजपा नेता सुशील मोदी को परिस्थितियों की डिप्टी सीएम कहा था, इतनी ही नहीं पीके ने यह भी कहा था कि बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा 2010 के फार्मूले पर होगा, यानी भाजपा के मुकाबले जदयू अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगा. इसके बाद भाजपा में उबाल पैदा हो गया. पीके का हमला जारी रहा. 13 जनवरी को उन्होंने कहा, बिहार में सीएए और एनआरसी लागू नहीं होगा, जबकि जदयू ने संसद में सीएए का समर्थन किया था. पीके के हमलों से भाजपा असहज हो गयी थी. तब मामला शांत करने के लिए नीतीश को ऑल इज वेल कहना पड़ा. नीतीश ने भाजपा पर सवाल उठाने वाले नेताओं प्रशांत किशोर और पवन वर्मा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया. 28 जनवरी को नीतीश ने खुलासा किया था कि प्रशांत किशोर को जदयू में लेने के लिए अमित शाह ने ही कहा था. भाजपा ने भी नीतीश पर भरोसा कायम रखा. अमित शाह ने कहा, हम नीतीश के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेंगे

फरवरी- तेजस्वी का रथ विवाद और पीके का नीतीश पर वार

फरवरी में सबसे बड़ा सियासी धमाका प्रशांत किशोर का नीतीश पर हमला था. जदयू से निकाले जाने के 20 दिन बाद ही पीके ने नीतीश से आमने-सामने की लड़ाई छेड़ दी. उन्होंने 18 फरवरी को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था, नीतीश कुमार मेरे पिता तुल्य हैं लेकिन वो भाजपा के पिछलग्गू बन गये. उन्होंने नीतीश की नीतियों की धज्जियां उड़ाते हुए कहा था, गांधी और गोड्से की विचारधारा एक साथ नहीं चल सकती. राजद नेता तेजस्वी यादव 23 फरवरी से बेरोजगारी हटाओ यात्रा पर निकलने वाले थे, इसके लिए एक लग्जरी बस को हाईटेक रूप दिया गया था. इस बस को युवा क्रांति रथ का नाम दिया गया था।लेकिन नीतीश सरकार के तत्कालीन मंत्री नीरज कुमार के एक खुलासे से यह यात्रा विवादों में आ गयी थी। नीरज कुमार ने आरोप लगाया था कि तेजस्वी ने यह बस जालसाजी कर खरीदी है, जिसे मंगल पाल नाम के व्यक्ति पर यह बस खरीदी गयी थी वह बीपीएल कार्डधारी है. बाद में राजद के पूर्व विधायक अनिरुद्ध यादव ने कहा था कि उन्होंने मंगल पाल के नाम पर ये बस खरीदी है. 19 फरवरी को दिल्ली के हुनर हाट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिट्टी-चोखा खा कर बिहार के चुनावी परिदृश्य में नये रंग भर दिये थे. भाजपा के नये राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जब पटना आये तो उन्होंने नीतीश कुमार से मुलाकात की. उन्होंने एक बार फिर नीतीश के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कही.

मार्च – अदृश्य दानव का आगमन

भारत में कोरोना की आहट शुरू हो गयी थी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना से निबटने के लिए पहली बार 4 मार्च को अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी. भारत में 11 मार्च को कोरोना से पहली मौत कर्नाटक में हुई थी. उस समय तक बिहार में यह बीमारी नहीं आयी थी. संक्रमण से बचाव के लिए 14 मार्च से सभी स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान बंद कर दिये गये थे. 15 मार्च को जब केन्द्र ने कोरोना को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया तो दो दिन बाद बिहार में महामारी कानून लागू कर दिया गया. सभी मॉल 31 मार्च तक बंद कर दिये गये. 21 मार्च को बिहार में कोरोना से पहली मौत हुई. कोरोना संक्रमण की चेन मुंगेर से शुरू हुई थी. 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लागू हुआ और लोग पहली बार घरों में बंद रहे. फिर 25 मार्च से पूरे देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन लागू हो गया. जब जिंदगी ही ठप हो गयी तो भला राजनीति की चिंता कौन करे. लॉकडाउन ने दिल्ली में काम करने वाले हजारों बिहारी श्रमिकों की रोजी रोटी छीन ली. वे घर लौटने के लिए दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश की सीम पर जमा होने लगे. उत्तर प्रदेश की सरकार ने श्रमिकों को लाने के लिए 1000 हजार बसों का इंतजाम किया तो नीतीश कुमार ने इससे असहमित जता दी. उन्होंने 28 मार्च को कहा, लॉकडाउन के निर्देशों को तोड़ कर लोगों को बस में लाना खतरनाक होगा, इससे अगर कोरोना का फैलाव हुआ तो कौन जिम्मेवार होगा. लेकिन इस पर नीतीश का विरोध शुरू हो गया. राजद ने इस मुद्दे को उछाला तो नीतीश भी श्रमिकों को उनके गांव तक पहुंचाने के लिए राजी हो गये. 29 मार्च को बिहार सरकार ने दिल्ली से लौटे करीब 25 हजार कामगारों को उनके गांवों तक पहुंचाया।

अप्रैल- कोरोना से दहशत और रोजगार पर आफत

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी मरकज में शामिल बिहार के 86 लोगों की तलाश शुरू हुई. इनके कोरोना संक्रमित होने का संदेह था। पहचान छिपाये जाने से मुश्किल बढ़ी. 1 अप्रैल तब तक बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या 22 पहुंची. बिहार लौटने वाले 1 लाख 70 हजार लोगों की स्क्रीनिंग 4 अप्रैल से शुरु हुई. 5 अप्रैल को कोरोना के खिलाफ उम्मीदों का दीया जलाने के लिए रात 9 बज कर 9 मिनट पर बिजली की लाइटें बुझायी गयीं. मोमबत्ती और दीया जला कर कोरोना का अंधकार मिटाने का संकल्प लिया गया. नीतीश सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे एक लाख 42 हजार श्रमिकों के खाते में एक-एक हजार रुपये भेजे. मंत्री विधायकों के वेतन में 15 फीसदी कटौती का फैसला. कोरोना से दहशत का तो माहौल बना ही लोगों के रोजगार पर आफत आ गयी. रोज कमाने खाने वाले मुश्किल में पड़ गये. सीवान में एक कोरोना संक्रिमत ने अपने ही परिवार को 24 लोगों को पॉजिटिव बना दिया. 11 अप्रैल तक कुल संक्रमितों की संख्या 60 पर पहुंची. 15 अप्रैल से 3 मई तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा. विभिन्न जिलों में तबलीगी जमात से डुड़े 49 विदेशी गिरफ्तार किये गये. लॉकडाउन बढ़ाये जाने की घोषणा के बाद बिहार के बाहर काम कर रहे श्रमिकों के सब्र का बांध टूट गया. मुम्बई, सूरत, अहमदाबाद, हैदराबाद जैसे शहरों में हजारों श्रमिक सड़कों पर उतर गये. पुलिस के बल प्रयोग किये जाने पर नाराजगी फूटी. 27 दिनों की सख्ती के बाद बिहार में 20 अप्रैल से कुछ क्षेत्रों में शर्तों के साथ ढील शुरू हुई. निर्माण कार्य और खेती से जुड़े काम में छूट लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूरी. 30 अप्रैल को दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों और छात्रों को लाने के लिए आवागमन की छूट मिलने पर नीतीश कुमार ने स्वागत किया.

मई- श्रमिकों, छात्रों को बिहार लाने पर राजनीति

कोटा में पढ़ने वाले छात्रों और दूसरे राज्यों में काम करने श्रमिकों को बिहार लाने पर राजनीति शुरू हो गयी. राज्य सरकार को अपने खर्चे पर इन्हें लाना था. पहले सरकार ने संसाधन और सुरक्षा का सवाल उठाया था, इस पर तेजस्वी यादव ने कहा था कि अगर सरकार के पास संसाधन कम है तो राजद अपने खर्चे पर एक हजार बसें कोटा भेज सकता है. पूर्व सांसद पप्पू यादव ने तो अपनी तरफ से 30 बसें कोटा भेज भी दीं, जब नीतीश सरकार छात्रों और श्रमिकों को लाने पर राजी हो गयी तो विपक्ष ने आरोप मढ़ दिया कि यह उनके दवाब की वजह से हो रहा है. दूसरे राज्यों में फंसे 28.29 लाख बिहारी श्रमिकों ने नीतीश सरकार से मदद के लिए आवेदन दिया, इनमें से 17.69 लोगों को सरकार ने खाते में एक-एक हजार रुपये भेज दिये थे. छात्रों और श्रमिकों को बिहार लाने के लिए स्पेशल रेलगाड़ियां चलनी शुरू हुईं. 3 मई को स्पेशल ट्रेन से 1187 लोग राजस्थान से दानापुर पहुंचे. इनमें छात्र और मजदूर दोनों शामिल थे. कोटा से छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन खुली. बाहर से आने वाले लोगों के लिए हर जिले में क्वारेंटाइन सेंटर बनाये गये, जहां इनके रहने खाने और जांच का इंतजाम किया गया था. डेढ़ महीने बाद पटना में 8 मई को इलेक्ट्रोनिक्स और ऑटोमोबाइल्स की दुकानें खुलीं. स्पेशल ट्रेन से श्रमिकों के आने का सिलसिला जारी रहा. तेजस्वी यादव ने क्वारेंटाइन सेंटरों में बदहाली को मुद्दा बना कर सरकार को घेरा. कई श्रमिकों ने भी घटिया भोजन और रहने की समस्या को लेकर असंतोष जाहिर किया. बिहार में कोरोना का संक्रमण बढ़ने लगा. 12 मई तक 749 मरीज हो चुके थे.

जून- पहली वर्चुअल रैली, सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी

1 जून से सभी दुकानें (कंटेनमेंट जोन छोड़ कर) सातों दिनों के लिए खुलीं. पहले की तरह वाहन चलने लगे, सिर्फ नाइट कर्फ्यू लागू रहा. कोरोना संकट में ठप पड़ी राजनीति शुरू हुई. बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गृह मंत्री अमित शाह ने 7 जून को वर्चुअल रैली की. यह देश की पहली वर्चुअल रैली थी. फेसबुक, ट्वीटर और यूट्यूब पर इस रैली का लाइव प्रसारण हुआ जिसमें लाखों लोग जुड़े. अमित शाह ने दो तिहाई बहुमत से बिहार में सरकार बनाने का दावा किया दूसरी तरफ नीतीश कुमार ने भी इसी दिन पांच जिलों के कार्यकर्ताओं के साथ वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिये संवाद किया. नीतीश ने कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा. 10 जून तक 1504 स्पेशल ट्रेनों के जरिये करीब 21 लाख लोग दूसरे राज्यों से बिहार आये. 11 जून को लालू यादव के जन्मदिन पर राजद में उत्साह दिखा. जदयू ने बेनामी सम्पत्ति का मुद्दा उठाया तो 11 जून को ही नीतीश कुमार ने जदयू कार्यकर्ताओं के साथ वर्चुअल संवाद कर पार्टी की चुनावी तैयारियों को तेज किया. 13 जून को बिहार में कोरोना मरीजों की संख्या छह हजार के पार हुई. बिहार के रहने वाले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को मुम्बई के अपने आवास में खुदकुशी कर ली. तो इसी दौरान राजद में फूट पड़ गई. 23 जून को रघुवंश प्रसाद सिंह ने राजद के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया जिसके बाद राजद के पांच विधान पार्षद जदयू में शामिल हो गए.

जुलाई – बाढ़, कोरोना और सुशांत मामले में ट्विस्ट

3 जुलाई को तेजस्वी ने लालू-राबड़ी शासन के दौरान भूल के लिए जनता से माफी मांगी. 10 जुलाई को केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि अब लोजपा पर मेरा वश नहीं, चिराग का फैसला ही अंतिम होगा. चिराग और नीतीश कुमार के बीच तनातनी के बीच इस बयान से एनडीए असहज हो गया. कोरोना के मामले बढ़ने पर राज्य में 16 से 31 जुलाई तक फिर लॉकडाउन लागू हो गया. गोपालगंज में 263 करोड़ की लागत से बने सत्तरघाट पुल के एप्रोच रोड ढहने पर राजनीति हुई. तेजस्वी ने नीतीश सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया तो चिराग पासवान ने इसकी जांच की मांग कर दी. 25 जुलाई तक बिहार के 10 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई थी और बाढ़ और कोरोना से लोग बेहाल हो गये. रिम्स में लालू के सेवादार के कोरोना संक्रमित होने पर पूरे फ्लोर को खाली कराया गया. जांच के बाद लालू यादव निगेटिव पाये गये. कोरोना संकट के बीच राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव उदय सिंह कुमावत को हटा कर अमृत प्रत्यय को जिम्मेवारी दी गई. सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने 28 जुलाई को पटना में रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के खिलाफ FIR दर्ज करायी. केके सिंह ने कहा कि मुम्बई पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है. मामले की जांच के लिए पटना पुलिस की टीम मुम्बई रवाना हुई. सुशांत की मौत के 44 दिन बाद पटना में FIR दर्ज होने के बाद इस मामले में लगातार टर्न और ट्विस्ट आते गये. 30 जुलाई को सुशांत मामले की जांच में ईडी भी शामिल हो गया. बिहार सरकार रिया चक्रवर्ती की याचिका के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गयी.

अगस्त – छाया रहा सुशांत मामला

1 अगस्त को सुशांत केस में ईडी ने 15 करोड़ रुपये के लेनदेन के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया. सुशांत मामले की जांच करने मुम्बई गयी बिहार पुलिस की टीम के साथ वहां की पुलिस ने धक्का-मुक्की की. मुम्बई पुलिस ने बिहार पुलिस के अफसरों को को मीडिया से बात नहीं करने दिया और धकेल कर गाड़ी में बैठा दिया. 2 अगस्त को नीतीश कुमार ने कहा कि अगर सुशांत के पिता कहेंगे तो सीबीआई जांच के लिए सिफारिश करूंगा. बिहार पुलिस की जांच से मुम्बई पुलिस की खामियां उजागर होने लगीं. बिहार पुलिस ने स्टैबलिश किया कि सुशांत मामले का दिशा सालियान की खुदकुशी से जरूर कोई कनेक्शन है. इससे नाराज मुम्बई पुलिस बदसलूकी पर उतर आयी. बिहार पुलिस की जांच को और तेज करने के लिए पटना के सिटी एसपी विनय तिवारी मुम्बई पहुंचे तो उन्हें क्वारेंटाइन के नाम पर एक गेस्ट हाउस में बंद कर दिया गया. जब बिहार टीम मे सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की खुदकुशी से जुड़ी फाइल मांगी तो मुम्बई पुलिस ने उसे कम्प्यूटर से डिलीट होने का बहाना बना दिया. महाराष्ट्र सरकार ने सुशांत मामले को बिहार से लड़ाई का मुद्दा बना दिया. 4 अगस्त को नीतीश कुमार ने सुशांत मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी, इसके बाद महाराष्ट्र बनाम बिहार की लड़ाई और तेज हो गयी. 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में राममंदिर निर्माण की नींव रखी. सुशांत मामले की सीबीआई जांच शुरू हुई. बिहार से पहला रणजी मैच खेलने वाले यशस्वी क्रिकेटर महेन्द्र सिंह धोनी ने 15 अगस्त को क्रिकेट से संन्यास लिया तो वहीं श्याम रजक जदयू से राजद में शामिल हुए. राजद के तीन विधायक जदयू में शामिल हुए तो जीतन राम मांझी महागठबंधन से अलग हुए.

सितम्बर- रिया गिरफ्तार, चुनाव की घोषणा

जीतन राम मांझी फिर एनडीए में शामिल हुए. बिहार में चुनावी सरगर्मी बढ़ी. सुशांत मामले में ड्रग कनेक्शन आने के बाद 4 सितम्बर को रिया का भाई शौविक और हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा गिरफ्तार हुए. नीतीश कुमार ने एसटी-एसी की हत्या पर आश्रित को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की. 7 सितम्बर को नीतीश की पहली वर्चुअल रैली का आयोजन हुआ. जदयू ने दावा किया कि इस डिजिटल संवाद से राज्य के करीब 20 लाख लोग जुड़े. नीतीश ने अपने काम को गिनाया और इसके आधार पर जनता से समर्थन मांगा. सुशांत की मौत के 86 दिन बाद 8 सितम्बर को रिया चक्रवर्ती गिरफ्तार हुई. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने रिया के ड्रग सिंडिकेट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया. उधर बिहार में राजद से नाराज रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दिया. लालू यादव ने कहा कि आप कहीं नहीं जाएंगे, जल्द स्वस्थ होइए तो करेंगे बात कहकर लालू ने इस्तीफा नामंजूर किया. रघुवंश प्रसाद सिंह ने पत्र लिख कर नीतीश कुमार को तीन सुझाव दिये. भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा नीतीश कुमार से मिले और सीट बंटवारे पर चर्चा की. 13 सितम्बर को रघुवंश प्रसाद सिंह का निधन हुआ तो 25 सितम्बर को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कार्यक्रम घोषित किए गए. कोरोना काल में देश के पहले विधानसभा चुनाव के लिए कई विशेष प्रावधान लागू. एनडीए में लोजपा को मिला 27 सीटों का प्रस्ताव जिसे चिराग ने स्वीकार नहीं किया. उपेन्द्र कुशवाहा भी महागठबंधन से अलग हुए

अक्टूबर – पहले चरण में 54.01 फीसदी वोटिंग

सीट बंटवारे पर चर्चा के लिए चिराग पासावान ने अमित शाह मुलाकात की लेकिन 27 से अधिक सीटें देने पर सहमति नहीं बनी. 3 अक्टूबर को महागठबंधन में सीटों का बंटवारा फाइनल हो गया. तरजीह नहीं मिलने से नाराज मुकेश सहनी ने महागठबंधन छोड़ने का एलान किया. 4 अक्टूबर को लोजपा एनडीए से बाहर हो गयी और 144 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया. तबीयत खराब होने के बाद केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के दिल का ऑपरेशन हुआ. 6 सितम्बर को एनडीए के बीच सीटों का बंटवारा हुआ तो भाजपा ने एक बार फिर नीतीश को ही सीएम बनाने की बात कही. जदयू ने अपने कोटे की 115 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जिसमें 10 विधायकों का टिकट काटा. डीजीपी पद से वीआरएस लेने वाले गुप्तेश्वर पांडेय को जदयू ने टिकट नहीं दिया तो सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी एनडीए में शामिल हो गए. भाजपा ने अपने कोटे की 11 सीटें दी. 8 अक्टूबर को केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन हुआ तो वहीं शरद यादव की बेटी सुभाषिनी राव कांग्रेस में शामिल हुईं जिनको बिहारीगंज से उम्मीदवार बनाया गया. बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने लोजपा को वोटकटवा कहा. नरेन्द्र मोदी के नाम का इस्तेमाल किये जाने पर सुशील मोदी ने चिराग को चेतावनी दी. अमित शाह ने कहा, अगर भाजपा को अधिक सीटें मिलती हैं तब भी नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे. तेजस्वी के 10 लाख सरकारी नौकरी देने के वायदे पर नीतीश ने कहा कि पैसा कहां से लाएंगे. 28 अक्टूबर को पहले चरण के चुनाव में वोटरों ने दिखाया उत्साह और कोरोना के खौफ के बाद भी बिहार में 54. 01 फीसदी वोटिंग हुई.

नवम्बर – नीतीश सातवीं बार मुख्यमंत्री

3 नवम्बर को दूसरे चरण के चुनाव में 54.44 फीसदी वोटिंग हुई. शहरी वोटरों ने सुस्ती दिखायी तो ग्रामीण इलाकों में वोटिंग को लेकर उत्साह रहा. नीतीश कुमार ने पूर्णिया की धमदाहा रैली में कहा कि अंत भला तो सब भला, ये मेरा अंतिम चुनाव प्रचार है. इसके बाद नीतीश के संन्यास लेने की अटकलें शुरू हुईं जिसे उन्होंने खारिज कर दिया. 7 नवम्बर को तीसरे चरण के चुनाव में 57.91 फीसदी वोटिंग हुई. आठ में चार एग्जिट पोल ने महागठबंधन को बहुमत मिलता दिखाया, दो ने त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान लगाया। एक ने एनडीए को बहुमत के आसपास दिखाया, इसके बाद राजद में उत्साह छा गया. 10 नवम्बर को जब मतों की गिनती शुरू हुई तो एग्जिट पोल के सर्वे धरे के धरे रह गये. क्रिकेट के किसी रोमांचक मैच की तरह मुकाबला आखिरी ओवरों में ही नतीजों पर पहुंचा. एनडीए ने 125 सीटें जीत कर बहुमत प्राप्त कर लिया तो महागठबंधन 110 पर आ कर अटक गया. नीतीश कुमार रिकॉर्ड सातवीं बार मुख्यमंत्री तो बने लेकिन जदयू (43) भाजपा से बहुत पिछड़ गया. 74 सीटें जीतने वाली भाजपा ने अपना प्रभाव दिखाया. उसने सरकार में दो उपमुख्यमंत्री पद हासिल कर एक तरह से जदयू पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनायी. तारकिशोर प्रसाद भाजपा विधायक दल के नेता चुने गये. रेणु देवी को विधायक दल का उपनेता चुना गया और दोनों डिप्टी सीएम बने. सुशील कुमार मोदी को बिहार से दिल्ली भेज कर भाजपा ने नीतीश को संकेत दे दिया कि अब वह अपने तरीके से राजनीतिक दिशा तय करेगी. 16 नवम्बर को नीतीश समेत 15 मंत्रियों ने शपथ ली. मुकेश सहनी चुनाव हारने के बाद भी मंत्री बने तो जीतन राम मांझी के एमएलसी पुत्र संतोष कुमार सुमन को कैबिनेट में जगह मिली. नियुक्ति विवाद के तूल पकड़ने पर जदयू कोटे के मंत्री मेवा लाल चौधरी को इस्तीफा देना पड़ा. भाजपा के विजय कुमार सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष बने. स्पीकर के चुनाव के पहले लालू यादव विवादों में आ गये. उन पर आरोप लगा कि उन्होंने जेल से फोन कर भाजपा विधायक ललन पासवान को वोटिंग के समय गैरहाजिर रहने के लिए कहा था. इस मामले में लालू यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. विवाद के उभरने के बाद लालू यादव को रिम्स निदेशक के बंगले से हटा कर फिर पेईंग वार्ड में शिफ्ट करना पड़ा. 27 सितम्बर को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निजी टिपण्णी कर दी, यह सुन कर नीतीश कुमार आगबबूला हो गये.

दिसम्बर – कोरोना का टीका मुफ्त देने की घोषणा

5 दिसम्बर को उपेन्द्र कुशवाहा अचानक मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और नीतीश कुमार से मुलाकात की, इसके बाद नये राजनीतिक समीकरण की अटकलें शुरू हो गयीं. पिछले कई वर्षों से कुशवाहा का नीतीश कुमार से कड़वा रिश्ता रहा है. विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने नीतीश कुमार हराने के लिए पूरा जोर लगाया था इसके बावजूद वो नीतीश से मिले तो कयास लगने लगे. मेवा लाल चौधरी के इस्तीफे के बाद नीतीश को भी एक कुशवाहा नेता की जरूरत है इसलिए यह चर्चा चल पड़ी कि नीतीश कुमार उपेन्द्र कुशवाहा को एमएलसी बना कर मंत्री बना सकते हैं. तेजस्वी ने जब नीतीश पर निजी टिपण्णी की थी तब कुशवाहा ने उनका पक्ष लिया था लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ. सुशील कुमार मोदी निर्विरोध राज्यसभा के सदस्य चुने गये. दिल्ली के किसान आंदोलन के समर्थन में बुलाये भारत बंद का बिहार में भी असर दिखा. बिहार में बढ़ते अपराध पर नियंत्रण के लिए नीतीश कुमार ने अधिकारियों के साथ तीसरी बैठक की. क्राइम कंट्रोल के लिए रात में गश्ती के लिए आईजी स्तर के अधिकारियों को मोर्चा संभालने का निर्देश दिया. 11 दिसम्बर को दुमका कोषागार मामले में जमानत की सुनाई टलने से लालू यादव अभी डेढ़ महीने तक जेल (रिम्स) में ही रहेंगे, इस मामले में अगली सुनवाई 22 जनवरी 2021 को होगी. नीतीश सरकार ने राज्यवासियों को कोरोना का टीका मुफ्त देने की घोषणा की तो साथ ही 20 लाख लोगों को रोजगार देने के लिए एक कार्ययोजना बनाने का प्रस्ताव भी दिया.