NMCH के गेट के बाहर तड़प-तड़प कर मर गया कोरोना मरीज

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Patna: अस्पताल प्रशासन जहां कोरोना पीड़ित मरीजों के सफल इलाज का लगातार दावे करता रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से शुक्रवार को एक कोरोना पीड़ित मरीज की अस्पताल परिसर में तड़प-तड़प कर मौत हो गयी. मरीज आधे घंटे तक मेडिसिन विभाग (Department of Medicine) के गेट के पास ही तड़पता रहा, पर अस्पताल में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उनकी सुध लेना भी उचित नहीं समझा.

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कोरोना पीड़ित बुजुर्ग मरीज मेडिसिन विभाग के गेट के पास तड़पता रहा. मरीज के परिजनों ने उसे भरसक उठाने की कोशिश की पर अस्पताल के किसी भी कर्मचारी ने उसे हाथ लगाना उचित नहीं समझा. अस्पताल में तैनात स्वास्थ्यकर्मी और सुरक्षाकर्मी मूदर्शक बने रहे, और अंत में तड़प-तड़प कर मरीज की मौत हो गयी. मृतक की पहचान सारण जिले के नौतन निवासी 58 वर्षीय बुजुर्ग कन्हैया प्रसाद के रूप में की गई है, जो बीते 17 जून को गंभीर हालत में एनएमसीएच में भर्ती कराए गए थे.

मिली जानकारी के अनुसार कोरोना जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने पर उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अन्य वार्ड से मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया जा रहा था. आरोप है कि अस्पताल के वार्ड अटेंडेंट ने मरीज को ट्रॉली तक नहीं दी. अंत में मजबूर होकर मरीज के परिजन मरीज को अपने साथ लेकर मेडिसिन विभाग की तरफ चल पड़े, लेकिन मेडिसिन विभाग के गेट पर ही बुजुर्ग मरीज गिर पड़े, और तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो गयी.

घटना के संबंध में पूछे जाने पर मृतक के पुत्र सचिन कुमार ने बताया कि कन्हैया प्रसाद सांस की बीमारी से पीड़ित थे, साथ ही उन्हें तेज बुखार भी था. अगर अस्पताल में समय पर उनका इलाज किया जाता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी. मृतक के पुत्र ने राज्य सरकार से न्याय की गुहार लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की भी मांग की है.

वहीं अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही से कोरोना पीड़ित मरीज की मौत के संबंध में पूछे जाने पर अस्पताल अधीक्षक डॉ निर्मल कुमार सिन्हा ने कहा कि कन्हैया प्रसाद गंभीर सांस की बीमारी से पीड़ित थे. साथ ही वह कोरोना पॉजिटिव थे. हालांकि इस दौरान अधीक्षक ने माना कि मरीज को शिफ्ट करने के वक्त वार्ड अटेंडेंट को हर हाल में मरीज के साथ होना चाहिए था.

अस्पताल अधीक्षक ने पूरे मामले की जांच किए जाने का भरोसा दिलाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई किए जाने की भी बात दोहराई है. पर सबसे अहम सवाल यह है कि अस्पताल परिसर में ही मरीज आधे घंटे तक इलाज के अभाव में तड़प-तड़प कर मर गया और अस्पताल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी.