बिहार में अब महंगा हो गया घर बनाने का सपना, ये हैं वजह

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Desk: बालू में महंगाई की आग लग गई है। अब घर बनाने का सपना थोड़ा मुश्किल होगा। बिहार सरकार ने मंगलवार को बंदोबस्ती का रेट 50 प्रतिशत बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर ऐसे लोगों पर पड़ेगा जो जनवरी में घर बनाने की योजना में हैं। सरकार के इस फैसले से 17 हजार रुपए में मिलने वाले एक ट्रक बालू के लिए अब ग्राहकों को 23 हजार रुपए देना होगा।

पूर्व में 20 प्रतिशत होती थी बढ़ोतरी

बालू के कारोबार से जुड़े राजेश सिंह का कहना है कि पहले सरकार हर साल 20 प्रतिशत बढ़ोतरी करती थी। इससे महंगाई की मार अचानक से नहीं पड़ती थी, लेकिन एक बार में भी बंदोबस्ती को 50 प्रतिशत बढ़ाने से बालू के दाम में अचानक से बड़ी उछाल देखने को मिलेगी। चालान का रेट भी बढ़ेगा, जिससे भाड़े पर असर आएगा। इसका असर आम आदमी पर पड़ेगा, जिसको बालू लेना होगा।

बालू पर सरकार की दोहरी मार

बालू कारोबारी मोहम्मद असलम का कहना है कि बिहार सरकार ने एक सप्ताह पूर्व भी बालू को लेकर बड़ा निर्णय लिया था, जिसमें 14 चक्के वाले ट्रकों का परिचालन गिट्‌टी बालू के लिए बंद कर दिया गया। इसका असर चालान पर पड़ा था। बालू की बंदोबस्ती कराने वाली कंपनियाें ने सरकार के 14 चक्का ट्रकों को लेकर हुए फैसले के साथ ही चालान का रेट बढ़ा दिया था।

एक सप्ताह पूर्व बढ़ाया गया रेट

बालू की कंपनियों ने एक सप्ताह पूर्व चालान का रेट बढ़ाया है। इसमें 10 चक्का ट्रक के लिए चालान का रेट 11500 कर दिया, 12 चक्का ट्रक के लिए 13500 कर दिया। मंगलवार को भी चालान का रेट बढ़ाया गया है जिसके बारे में बताया जा रहा है कि 2 हजार रुपए की एक साथ बढ़ोतरी की गई है। चालान के साथ ही ट्रकों का किराया भी बढ़ा दिया गया है। इससे जरुरतमंद तक बालू पहुंचते-पहुंचते रेट काफी हाई हो जाए।

फुटकर दुकानदारों की भी बढ़ेगी मुश्किल

बालू का रेट आने वाले दिनों में काफी ज्यादा होगा। पटना के फुटकर बालू कारोबारी अनिल कुमार सिन्हा का कहना है कि अभी 6 चक्के ट्रक में लोड बालू के लिए 17 हजार रुपए लिया जाता है। लेकिन बंदोबस्ती में 50 प्रतिशत इजाफा के बाद इसका दाम लगभग 23 हजार हो जाएगा। ट्रैक्टर ट्राली के बालू के लिए अभी 5 हजार रुपया लिया जाता है, जो 50 प्रतिशत बंदोबस्ती बढ़ने के बाद लगभग 6500 रुपया हो जाएगा। एक जनवरी से नया रेट लागू हो जाता है। अनिल कुमार का कहना है कि बालू का रेट बढ़ने से काफी समस्या होती है। ग्राहकों को समझाना काफी मुश्किल हो जाता है। ग्राहकों से झिकझिक होती है। वह भाड़ा नहीं देना चाहते, अचानक से जब अधिक दाम बढ़ता है तो समस्या हो जाती है।